ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ति प्रचोदयात् ॥ ब्रह्मदत्त
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ !
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा !!
ब्रह्मदत्त त्यागी
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आज श्री गणेश जी का शुभ दिन बुधवार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का श्री गणेश जी को बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है, आज जून माह का प्रथम दिन है बुधवार आप सभी को शुभ बुधवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त दोस्तों मित्रों साथियों की तरफ से
तिथि विवरण......
01 जून 2022, ज्येष्ठ शुक्ल 2
बुधवार व्रत
बुधवार व्रत विधि -
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अग्नि पुराण के अनुसार बुध-संबंधी व्रत विशाखा नक्षत्रयुक्त बुधवार को आरंभ करना चाहिए और लगातार सात बुधवार तक व्रत करना चाहिए।
मान्यतानुसार बुधवार का व्रत शुरू करने से पहले गणेश जी के साथ नवग्रहों की पूजा करनी चाहिए। व्रत के दौरान भागवत महापुराण का पाठ करना चाहिए।.........➖ ब्रह्मदत्त
बुधवार व्रत शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से शुरू करना अच्छा माना जाता है। जिस व्यक्ति को बुधवार का व्रत करना हों, उस व्यक्ति को व्रत के दिन प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए। उठने के बाद प्रात: काल में उठकर पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद नित्यक्रिया से निवृ्त होकर, स्नानादि कर शुद्ध हो जाना चाहिए। स्नान करने के बाद संपूर्ण घर को गंगा जल छिडकर शुद्ध करना चाहिए। गंगा जल ने मिलें, तो किसी पवित्र नदी का जल भी छिडका जा सकता है. इसके पश्चात घर के ईशान कोण में किसी एकांत स्थान में भगवान बुध या शंकर की मूर्ति अथवा चित्र किसी कांस्य के बर्तन में स्थापित करना चाहिए। मूर्ति या चित्र स्थापित करने के बाद धूप, बेल-पत्र, अक्षत और घी का दीपक जलाकर पूजन करना चाहिए। इसके बाद निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए बुधदेव की आराधना करनी चाहिए -
बुध त्वं बुद्धिजनको बोधद: सर्वदा नृणाम्।
तत्वावबोधं कुरुषे सोमपुत्र नमो नम:॥पूरे दिन व्रत करने के बाद सायंकाल में भगवान बुध की एक बार फिर से पूजा करते हुए, व्रत कथा सुननी चाहिए. और आरती करनी चाहिए. सूर्यास्त होने के बाद भगवान को धूप, दीप व गुड, भात, दही का भोग लगाकर प्रसाद बांटना चाहिए, और सबसे अंत में स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करना चाहिए. व्रत करने वाले जातक को हरे रंग की माला या वस्त्रों का अधिक प्रयोग करना चाहिए।
भगवान बुध की मूर्ति ना होने पर शंकर जी की प्रतिमा के समीप भी पूजा की जा सकती है। पूरे दिन व्रत कर शाम के समय फिर से पूजा कर एक समय भोजन करना चाहिए। सायंकाल में व्रत का समापन करने के बाद यथा शक्ति ब्राह्माणों को भोजन कराकर उन्हें दान अवश्य देना चाहिए। और व्रत करने वाले व्यक्ति को एक ही समय भोजन करना चाहिए। व्रत को मध्य में कभी नहीं छोडना चाहिए तथा व्रत की कथा के मध्य में उठकर नहीं जाना चाहिये। साथ ही प्रसाद भी अवश्य ग्रहण करना चाहिए। बुधवार व्रत में हरे रंग के वस्त्रों, फूलों और सब्जियों का दान देना चाहिए।
प्रस्तुतकर्ता ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़