“हाथ पकड़ ले, अभी तेरा हो सकता हूं मै।
भीड़ बहुत है, इस मेले में खो सकता हूं मैं।।
और पीछे छुटे साथी, मुझको याद आते हैं।
वरना इस दौड़ में, सबसे आगे हो सकता हूं मैं।।
और एक मासूम सा बच्चा, मुझ में अब तक जिंदा है।
छोटी-छोटी बातों पर भी, रो सकता हूं मैं।।” © जतिन त्यागी