बस इतना ही !
मिला जो जीवन यूँ ही सही बस चल जाये |
हो ग़म या खुशी बीच सम्भल जाये ||
बन सकूँ न सुकूँ, मुस्कान चेहरे की ,
किसी की, परिणाम आँसू किसी के न,
मेरे हिस्से आये ||
भले न पाऊँ हिस्सेदार किसी के
दुःख मे मगर तृणभर कारण न बनूँ न नजर आऊँ ||
#पर_पीड़ा
#अंतिम_अभिलाषा |