Hindi Quote in Quotes by Dr Jaya Shankar Shukla

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३६ लाख साल के मानवजात के इतिहास में ६० हजार साल पहले भारत वर्ष में सभ्यता का उदय होना और पूरे एसिया खंड में फैल कर में जंबूद्वीप का अस्तित्व में आना कल की ही बात हो जाती है. लेकिन वो मानव सभ्यता का आरंभ था.
ऐसे ही ६० हजार साल के मानव सभ्यता के इतिहास में १३००० साल पहले राम और कृष्ण का आना भी कल की ही बात हो जाती है.
लेकिन सुनहरे कल को भुलाने के लिए आज की औलाद "कल की न करो बात, बात करो आज की" के सुत्र से आज की सुबह को केवल ६ हजार साल तक ही पिछे ले जाते हैं. इस से पहले की कोइ बात सामने आती है तो वो मिथ हो जाता है.
इन ६ हजार साल के अंदर ही हवा में बातें करता उनका एकमेव इश्वर पैदा हो जाता है, हवा में से ही आदम और हौवा पैदा होते है और ६ हजार साल में ही धरती को आबादी से भर देते है. बीच में तो पूरी धरती पर प्रलय की भी योजना बनाई थी और एक नाव भर के आदम के वारिस नूहने नाव भर के मानव सहित कुछ जीव बचा लिए थे. उन के मतानुसार आज की आबादी का इतिहास ४-५ हजार साल से ज्यादा नही है, सब नाव में बैठे मानवों की संतान हैं.
कहने का मतलब यह है कि भारत के शत्रुपक्ष के इतिहासकारों ने मानव सभ्यता के इतिहास को बहुत छोटा कर दिया है, वैदिक काल को महज इसा के पहले १५०० बर्ष बताकर आज के नजदिक लाकर खडा कर दिया है. उनका इरादा शुध्ध काजल की तरह काला था. भारत के लोगों को उनके पुरखों का इतिहास भुलाना था और अपने खूद देशों के लोगों को पता नही लगने देना था कि उनके पूरखें कौन थे कैसे थे.
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जंबूद्वीप का बनाना आसान नही था. धर्म और अधर्म के युध्ध सतत चलते रहे हैं; - देवासुर संग्राम, भगवान शिवजी का त्रिशुल, भगवान विष्णु के विविध अवतार के संघर्ष, भगवान परशुराम के अनेक बार किए संघर्ष, राजाओं के छोडे अश्वमेघ के धोडे. भगवान कृष्ण का समय आते आते तो दक्षिण एसियाई देश, अरब, उत्तर आफ्रीका और युरोप भी जंबूद्वीप में शामिल हो गये थे.
डॉ जयशंकर शुक्ल

Hindi Quotes by Dr Jaya Shankar Shukla : 111801024
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