कुछ रिश्ते जन्म के मिले ,
कुछ कर्म के ,
कुछ बीच मे स्वतः ही जुड़े,
सबमे आत्मीयता प्रदर्शन
भरपूर रहा फिर ,
वक्त ने हिसाब माँगा ,
कुछ बगले झाँकने लगे ,
कुछ दामन बचाने लगे,
कुछ तोहमतो का अंबार लगाने लगे ,
बीच मे जुड़ा ऐसे टूटा कि बचा हुआ भी तोड़कर ले गया |#कोई_किसी_का_नही
#छलावा
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