सोचती हूँ क्या मै वही हूँ !
पवित्रता की मूर्ती ! या विशिष्टता का उद्बोधन?
क्या वही जो थी निश्छल मन तरंग ? क्या मै वही मना हूँ आत्मा मे समाहित ? वही रूप है मेरा जिसे देखने को आतुर रहते थे तुम ! या भर गया है मलीनता से? या भर गई हूँ क्षुद्रता से , या घेर लिया है छल ,कपट ,अहंकार भयंकर रोग ने मुझे ? या कुरूप , कुल्टा हो गई मै? आखिर ! क्या बदला है मुझमे ? क्या मै बदल गई?
क्या था मुझमें जो अब नही है ? मै जीवित नही हूँ क्या ? क्या मै मर गई ???
9/3/2022