बेटी:
यादों में तेरी इतना खो जाऊँ
तेरी विदाई से कहके आऊँ,
वे पहाड़ों के सपने, वे नदियों के तीर्थ,
व विद्यालय की पढ़ायी, वे विद्यालयों की लिखायी,
सरकते समय को हम हाथ देंगे,
कैसे शब्द जोडूँ , कैसे शब्द छोडूँ ,
तेरे आँसुओं को कहाँ मैं पिरोऊँ ,
शब्दों की माला कहाँ पर चढ़ाऊँ ,
दुवाओं का सबेरा तुझे देता जाऊँ ,
मैं यादों में गहरे तेरे खो जाऊँ ,
तेरी हँसी को पीता ही जाऊँ |
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* महेश रौतेला
२६.०३.२०१४