कुछ शेष न रखूँगी अपने पास शब्द,
सारे बयाँ कर दूँगी ,
क्या पता कब तुम्हारा बुलावा आ जाये,
निकलते शब्द कागज से पहले तुम्हे भा जायें मगर ,
विनती है तुमसे वह शब्द लिखा देना , पढ़े जो उसे उसका सब संशय मिटा देना , भर देना भक्ति , मुक्ति तुम उस एक शब्द मे | पढे़ जो उसे अपने पास शरणागति बुला लेना |