*माधविका-परिमल-ललिते*
*नवमालिकयातिसुगन्धौ।*
*मुनिमनसामपि मोहनकारिणी*
*तरुणाकारणबन्धौ।।*
(गीतगोविन्द - १/३३)
अर्थात् - यह वसन्त काल माधविका पुष्प की सुगन्धि से ललित और नई मालती की सुगंध से परिपूर्ण है, मुनियों के मन को भी मोहित करनेवाला है और तरूणों का सहज बन्धु है।
*🙏💐🌻मङ्गलं सुप्रभातम्🌻💐🙏*
*वसन्तोत्सव एवम रंगोत्सव की ढेर सारी शुभकामनाएं🌾🥀🌺🌸🌷🌴🪴🌼🌞🌈*