मैंने अपने दुख में भी कई लोगों को मुस्कुराते हुए देखा है
तो मैंने मेरे आंसुओं के संग कई लोगों को रोते हुए भी देखा है
मैंने इंसान के भेस में हैवान को भी देखा है
तो मैंने जानवर में भी प्रेम की भावना का भाव देखा है
हां मैंने देखा है लोगों को हालातों के अनुसार बदलते
पर एक बात मैंने यह भी सीखी है कि
इंसान अपनी फितरत पर ही कायम रहता है
हां जो जैसा है वह वैसा ही रहता है
चाहे वह इंसान के रूप में शैतान हो या
वह हो इंसान के रूप में भगवान बिंदु अनुराग
मैंने देखा है... वक्त पर बदलते हर इंसान को
मैंने देखा है रंग बदलते हर एक इंसान को...
हां मैंने देखा है...
04:05 AM 14/03/22
-Bindu _Anurag