जो जलते थे देख दूसरे
उनको आज है जलते देखा।
जिनको मान गुमान बहुत था उनको आज बदलते देखा।
जिनकी गरिमा लघुमा से सारा संसार कांपता था
उनको ही उनके परिजन से अंगारे में भरते देखा।
जिनके मखमल भोग रहे सबसे प्यारे।
उनको चुभते काटो पर लेटे देखा।
जो चीटी के चुम्बन से भी डरता था
आज उसे तिल तिल कर कटते देखा।
सब कुछ छूट गया।
एक
माया रचित जगत का होने वाला।
आज इसी माया से रूठ गया।
-Anand Tripathi