मातृभारती के सभी लेखको व पाठको और मातृभारती टीम मैनेजमेन्ट के लिए 👇
दोस्तो शब्दों की कीमत भावना है और भावनायें अनमोल है उसकी कीमत नही चुकाई जा सकती , जब एक लेखक कलम पकड़ता है तो कागज पर अपने आँसू अपनी पीड़ा उड़ेलता है , कभी किसी क्षण मुस्कुराहट की छाँव मिल जाती जहाँ कुछ पल रूककर सुस्ता लेता है | उसकी सारी ऊर्जा कागज और कलम के बीच समान्तर बनी रहती है , कविता तब बनती है, कहानियां तब गढ़ती है , उपन्यास तब लिखे जाते है | और उनका संबंध जब पाठक से होता है तो उसके अन्दर के सुप्त तारो को जोड़ देता है जो कि आनन्द के साथ वास्तविक जीवन से परिचय कराता है | जब मैने मातृभारती पर लिखना शुरू किया था तो आनलाईन मैनेजमेन्ट द्वारा लेखको को ऐप के प्रमोशन के साथ लाभ के बहुत सारे आश्वासन दिये गये थे | दस हजार शब्दो के उपन्यास पर मानदेय की बात भी की गई थी यह सब आनलाईन वार्तालाप फेसबुक के माध्यम से स्पष्ट हो रहा था , मै पूछती हूँ कहाँ गया वो आश्वासन ?आप लेखको के हित के लिए आखिर क्या कर रहें है , अगर मातृभारती से सारे लेखक हट जाये , उनकी सारी रचनायें हटा दी जाये तो मातृभारती का अस्तित्व आखीर क्या है यह बात केवल मातृभारती के लिए नही बल्कि मातृभारती जैसे और ऐप् स की भी "मातृभारती " यह नाम कितना सुन्दर है पढते ,सुनते मन भावो से भर जाता है इस नाम ने ही सर्वप्रथम मुझे इसकी तरफ आकर्षित किया था , एक विश्वास सा जुड़ गया था | आज भी कई साईडो पर लिखती हूँ लेकिन न जाने क्यों मेरा विश्वास मातृभारती पर छोड़कर किसी पर नही होता किन्तु जब इसके कारणों पर गौर करती हूँ तो इसका कोई ठोस कारण नजर नही आता सिवाय भावनात्मक जुड़ाव के ||
कहने को बहुत कुछ है , बस इतना ही | आपसब पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया अवश्यक दें 🙏