वेद वाणी 6-52-5
विश्वदानीं सुमसः स्याम पश्येम नु सूर्यमुच्चरन्तम्।
तथा करद्वसुपतिर्वसुनां देवाँ ओहानोऽवसागमिष्ठः॥ ऋग्वेद ६-५२-५॥
सूर्यदेव के प्रातःकाल दर्शन करने से हमारे मन-मस्तिष्क में उत्तम-सकारात्मक विचारो का सृजन होता है। जिनके यजन से
देवता भी प्रसन्न होते है, ऐसे अग्नि स्वरूप, धन के स्वामी सूर्यदेव हमारी रक्षा करे॥ ऋग्वेद ६-५२-५॥
By seeing the Sun God in the morning, good-positive thoughts are created in our mind. By whose performing worship, even the gods are pleased, in such a form of fire, the lord of wealth, the Sun God, protect us. Rigveda 6-52-5॥