एक संदेश --छोटा सा
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प्रेम-स्नेह के गीत गुनगुना
सबकी राम-कहानी बन जा ---
दिशा-दिशा में तम पसरा है
रोशन कर जग दानी बन जा ---
बाँट सुगंध सभी में ऐसी
प्रचलित एक कहानी बन जा ---
तन माटी में मिल जाना है
तू हर मन की वाणी बन जा ---
बरसा प्यार जगत भर में तू
चूनर रंगकर धानी बन जा ---
युद्ध कभी न दे पाता कुछ
रहम सीख ले प्राणी बन जा ---
क्षत-विक्षत संसार बनाकर
क्या पाएगा ज्ञानी बन जा ---
कल-कल बहता पानी बन जा ---
सबकी राम-कहानी बन जा ----
डॉ . प्रणव भारती