हां मैं एक नारी हूं।
कभी बलात्कार तो कभी दहेज,
कभी एसिड अटैक की मैं मारी हूं।
चाहे संज्ञा दे लाख मुझे दुर्गा–काली का,
दहलीज के भीतर दोयम दर्जे पे खड़ी,
जैसे घर भर के लिए मैं एक बीमारी हूं।
हां मैं एक नारी हूं।।
एक से है जन्म लिया और दूजा बना निवाला,
फिर क्यूं तेरी वहशी आंखें, बनाए तुझे मतवाला।
आती है लज्जा,
झुंक जाती है शर्म से ये आंखें,
बस इतनी सी चाह हमारी,
प्रेम और इज्जत से कोई हम नारियों को भी आंके।।
हां मैं एक नारी हूं।
सभी माताओं एवम् बहनों को सादर समर्पित
#WomensDay