तुम तुम्हीं हो ऐ हमें पता ना था ।।
इस बात को कभी तुमने जता ना था ।।
सुनहरी सी मुस्कान ऐ जो है तुम्हारी ।।
रातो की नींदो को जगाती है हमारी ।।
तुम सच में मुझे इस कदर भा गई ।।
किसी के हृदय में हलचल तुम मचा गई ।।
आंखों का काजल तुम्हारा मन में समाये ।।
कितना देखे इन आंखो में नशा सा दिखाऐ ।।
मेरे अल्फाज़ो में देखो कितनी है दृढ़ एकता ।।
कुछ भी सोंचू पाता तुम्हे सामने क्या तुम्हें है पता ।।
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