🌹💐पहेली मुलाक़ात💐🌹
दिल को छु जाने वाली बात थी वो,
उसकी ओर मेरी पहेली मुलाक़ात थी वो ।
दिल की धड़कने कुछ इस क़दर बढी सी थी,
मानो किसी से मिलने की हड़बड़ी में थी ।
ख़्यालों के तो पंख निकल आये थे जैसे,
हज़ारों सपने एक ही बार में नज़र आये थे जैसे ।
फिर वो घड़ी आ ही गई ,
जिसका मुझे इंतजार था ।
अरे इन्तज़ार तो नहीं कहूँगी,
डर था, डर क्यूं...?
क्योंकि......
क्या कहूँगी उससे मिलकर,
इसी सोच में पड़ी थी ।
वैसे तो मे बहुत बोलती हूँ,
लेकिन आज में थोड़ी घबराई हुई थी।
उसके पास आने पर,
में वहा चुपचाप खड़ी थी।
मानो जैसे बातें,
मेरी ही मुझ से लड़ी थी।
पास आकर उसने,
बस हल्का सा मुस्कुरा दिया।
मानो उसकी मुस्कुराहट ने,
मुझे सब कुछ समझा दिया।
हाल जब पूछा उसने मेरा,
मैंने थोड़ा हंस कर दिखाया।
अपनी भागी हुई हिंमत को,
पकड़ कर अंदर बिठाया।
फिर धीमी आवाज़ में ही,
मैंने उसे अपना हाल सुनाया।
बातों ही बातों में मैंने,
उसे सब कुछ समझाया।
जहां मुझे डर था कि,
में कुछ बोल नहीं पाऊंगी।
वहाँ में चुप होने का,
नाम ही नही ले रही थी।
वो पुछता गया ,
में बताती गई।
अपना हर पल,
उसके साथ सजाती गई।
एक दिवार के सहारे,
हम बस खड़े रहे।
आते जाते लोगों की,
नजरो से थोड़ा परे रहे।
वो बार बार कोशिश करता था,
मुझे अच्छे से देखने की।
मैं बार बार अपने बालों से,
अपना चेहरा छुपाती रही।
वो कुछ भी पूछता जब मुझ से,
में पहेले हल्की सी मुस्कान देती गई।
बात अब अंत तक पहुँच चुकी थी,
उसने पुछा : फिर मिलेंगे ?
पहेले ना ही मैंने हा की,
और ना ही मैने ना की।
फिर वक़्त कम था।।
जाते जाते उसने मुजसे,फिर,
फिर मिलने का इशारा किया।
वो देखकर में शर्मा गई ,
मानो जैसे वो मेरी हा थी।
बस यही हमारी पहली मुलाक़ात थी।।।