ताज महल
“कितना अरसा हुआ कोई उम्मीद जलाये,
कितनी मुद्दत हुयी किसी कंदील पे जलती रौशनी रखे ,
चलते फिरते इस सुनसान हवेली में,
तन्हाई से ठोकर खा के
कितनी बार गिरा हूँ मैं ;
चाँद अगर निकले तो अब इस घर में रौशनी होती है,
वर्ना अँधेरा रहता है.....!!!”
वाह ताज ! 👌