मित्रों को बसंत की स्नेहिल शुभकामनाएँ
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बसंत ऋतु आई ,मन भाई फूल रहीं फुलवारियाँ
टेसू फूले ,अंबुआ मौले ,चंपा,चमेली सरसों फूले
फूट रही कचनारियाँ----
भँवरे की गुंजन मन भाए ,ऋतु बासन्ती मन हर्षाए
आओ सब मिल शीष नवा लें,स्वर की साधना कर हर्षा लें
पुष्पित हैं अमराइयाँ ----
(माँ)
स्व.दयावती शास्त्री