शेरशाह की शेरनी
‘शेरशाह ' यह नाम सुनकर पाकिस्तानी सैनिकों की रूह काँप उठती थी।
आज विक्रम बत्रा की शौर्यगाथा हर घर में सुनाई जाती है कि कैसे वे बहादुरी से करगिल में लड़े, तिरंगा फहराया व माँ भारती की गोद में लेट गए।
परंतु जब कैप्टन साहब की देह तिरंगे में आई तो एक लड़की जिससे उनका रोका हुआ था वह बोली “ मेरी शादी विक्रम से नही हुई तो किसी से भी नही होगी। मैं उनकी दुल्हन नहीं बन पाई, तो उनकी विधवा बन कर रहुंगी।"
ये कहने वाली लड़की और कोई नही बल्कि उनकी मंगेतर डिंपल चीमा थी ।
डिंपिल से उनकी मुलाकात कॉलेज में हुई । दोनो पहले अच्छे दोस्त बने । फिर दोनो में प्यार हुआ।
फिर विक्रम का चयन CDS के लिए हो गया।
उन्होने डिंपल से वादा किया कि अब जब मिलेंगे तब हमारा रोका होगा और हुआ भी, और कुछ महीनौं में शादी थी ।
“परंतु जब माँ भारती बुलाती है तो सब रिश्ते छोटे पड़ जाते हैं।" जब विक्रम डिंपल से मिलने गए तो उनकी आँखो में आँसू थे क्योंकि
उन्होने विक्रम को उनके दोस्त से कहते हुए सुना कि या तो तिरंगा
लहरा कर आएंगे या उसमें लिपट कर ।
डिंपल की मनोदशा वे समझ गए और वहीं पर अपनी कटार से अपने हाथ के अंगूठे को चीर कर डिंपल की माँग भर दी ।
फिर भारतीय इतिहास के सबसे कठिन युद्ध यानी करगिल युद्ध में लड़ने चले गए।
वे वहाँ बहुत बहादुरी से लडे
और अपनी बात पूरी की। वे तिरंगा
फहरा कर भी आए और तिरंगे में लिपट कर भी। और इथर हमारी नायिका ने भी आजीवन वैधव्य की शपथ ली। वह सालों से शेरशाह की शेरनी बन कर रह रही हैं।
तुम शेर ए हिंद कहलाते,
मैं सिंहनी बन जाती हूाँ।
मिट गया जो नाम देश पर,
मैं उसे माथे पर सजाती हूाँ।
तुमने लिखी जो अमर गाथा,
मैं वह विरूदावली सुनाती हूँ।
तब सैनिक की नायिका कहलाती हूँ।