जय मां शैलपुत्री
प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है
आज बात करते है पंचम भाव की।
पंचम भाव यानि प्रारंभिक शिक्षा, संतान, प्रेम, प्रेमी/प्रेमिका, शेयर मार्केट और पूर्व जन्म के कर्म पंचम भाव से संबंधित है।
परंतु पंचम भाव और भी बहुत कुछ बताता है
✓जैसे कि आपके लग्न (प्रथम भाव) यानि आपकी प्रारंभिक शिक्षा, संतान, प्रेम, प्रेमी/प्रेमिका, शेयर मार्केट और पूर्व जन्म के कर्म है पंचम भाव।
✓आपके संचित धन और परिवार (२ भाव) का सुख है पंचम भाव।
✓आपके छोटे भाई बहनों (३ भाव) का पराक्रम है पंचम भाव।
✓आपकी माता का संचित धन एवं परिवार है पंचम भाव।
✓आपके शत्रुओं, ऋण, और रोग (६ भाव) का व्यय अर्थात हानि या क्षय है पंचम भाव।
✓आपके जीवनसाथी (७ भाव) का लाभ एवं इच्छा पूर्ति है पंचम भाव।
✓आपके गुप्त ज्ञान एवं आकस्मिक लाभ (८ भाव) से प्राप्त कार्य क्षेत्र है पंचम भाव एवं आपके ससुराल का कार्यक्षेत्र और कर्म भी यही पंचम भाव ही तो है।
✓आपके भाग्य, आध्यात्म और धर्म (९ भाव) से प्राप्त भाग्य अर्थात आपके भाग्य का भी भाग्य है पंचम भाव और तो और आपके पिता के संस्कार भी पंचम भाव ही तो है।
✓आपके कार्यक्षेत्र (१० भाव) से प्राप्त आकस्मिक लाभ और आपके पिता का गुप्त ज्ञान भी यही पंचम भाव ही है।
✓आपके मित्रों और बड़े भाई बहनों (११ भाव) के जीवन साथी भी यही पंचम भाव ही है और तो और आपके मित्रो एवं बड़े भाई बहनों के सामाजिक संबंध तथा व्यापारिक साझेदारी भी यही पंचम भाव है।
✓आपके व्यय, अपव्यय, हॉस्पिटल के चक्करों और कानूनी पचड़ों (१२ भाव) से प्राप्त धन हानि, ऋण, शत्रु और रोग बीमारियां भी यही पंचम भाव ही तो है। और तो और आपके शैय्या सुख और नींद के बीच आने वाली चिंताएं भी यही पंचम भाव ही है।
तो इसलिए पंचम भाव को केवल प्रारंभिक शिक्षा, संतान, प्रेम, प्रेमी/प्रेमिका, शेयर मार्केट और पूर्व जन्म के कर्म ही ना समझें अपितु बहुत कुछ है ये पंचम भाव।
आचार्य दीपक सिक्का
7065551066