मेरी कविता पढोगे तो नई कहानी बन जाएगी,
इसे फाडोगे तो भी हाथों मे इसकी अमिट निशानी बन जाएगी,
ये धारा है शब्दों की जो रोके भी रुकती नहीं
ये लगातार बहती नदी का पानी बन जाएगी,
और यकीन मानिए
मेरी ये कविता भी एक दिन इसे लिखने वाले की दीवानी बन जाएगी।।
-श्रुति शर्मा