हर रोज दिल दस्तक देता है मुझे, कुछ कहना था शायद इसे तुमसे पर सोच मे डूबा हुआ दिल जुबान से कहा बोल पाता, इश्क जैसा ही था इसे तुमसे आज भी है और हमेशा रहेगा
सब की कुछ ना कुछ मजबुरीया होती है हमारी तुम थे शायद और तुम्हारी मजबूरी कोई और ,
कुछ ऐसाही होता है इकतर्फा प्यार में तुम सिर्फ मेरे हो ये सोचते सोचते उम्र कहा आ गयी ये पता ही नही चला,
कुछ सपने थे तेरे शायद आँखों मे ही रेह गये, कुछ कहना था तुझे पर केह ना पाए शायद यही प्यार था जो आज भी इकतर्फा ज़िंदा है..........💓