" अपनी पहेचान हम खुद बनाए " ना की, कोई दूसरा
जब भलाई का बदला गलत मिलता है,
तब,
हमारे अंदर की भलाई खत्म नहीं होती,
बल्कि,
हम खुद भलाई करना छोड़ देते हैं.
तब क्या होता है ?
तब हमारे बारे में, लोग कहते हैं कि,
पहले ये इंसान बहुत ही अच्छा, और भला था.
इस तरह,
हमारी पूरी पहेचान बदल जाती हैं.
अगर हमे अपनी अच्छाई और अपनी सच्चाई के साथ-साथ जो हमे अभी समझ नहीं पा रहा वह इंसान भी,अगर आगे जाके, वो हमे समझ सकता है,
अगर हमे, इतना विश्वास हो तो,
हमे हमारी अच्छाई नहीं छोड़नी चाहिए, और... और... और...
अगर हमे लगे कि, हमारी लाख अच्छाईओ के बावजूद भी, वो हमे या हमारी बात को, समजनेमे असमर्थ ही रहने वाला है, तो फिर.....
तो फिर, हमे वह व्यक्तिकों,
वह बात को, या फिर
या फिर, उसपर आज तक लगाई हुई उम्मीद को छोड़ देना चाहिए,
मगर, मगर
यदि हमे, जीवनमें खुश रहेना हैं, तो कतई अपनी अच्छाई या भलाई नहीं छोड़नी चाहिए
-Shailesh Joshi