ग़ज़ल
******
2122 1221-2212
रात भर ख्वाब में मुस्कुराते रहे।
तुम हमें, हम तुम्हें याद आते रहे।।
तेरी यादों के सपने बुने इस तरह।
प्रीत के दीप हम भी जलाते रहे।।
दिल में तन्हाई है, मन परेशान हैं।
बस यही बात तुझको बताते रहे।।
तेरी तस्वीर से बातें करते हुए
अपनी तकदीर हम आजमाते रहे।।
तेरे लब पर उमा छाईं खामोशियां।
रश्म ए उल्फत मगर हम निभाते रहे।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित