शिर्षक: आशा का दीप
तुम आओगे तो पूछेंगे एक सवाल
बीती हुई जिंदगी का क्या रहा हाल ?
मिले थे कभी जब हम पिछली बार
तुम मुस्कराए, देकर हमें अपना आभार
चाहत हमारी, ऐसा ही हो कुछ इस बार
तुम्हारी मुस्कराहट पर सौ साँसे न्योछावर
जीने की वजह बदलती तो बहुत कुछ हो जाता है
इंसांनी दर्द पता नहीं, कब चेहरे पर उभर आता है
ख्याल अपना इतना रखना, सपनों में सोये रहना
मुस्कानी गुलाब भेज रहा, तकिये नीचे तुम रखना
यादें बड़ी मुलायम होती, पहलू संभल कर बदलना
न याद आऊं तुम्हें कभी, मुस्कराते हुए फिर मिलना
फिर कभी मिलेंगे, इस सोच में जीवन चलता रहता है
न मिले तो क्या आशा का दीप तो जलता ही रहता है
✍️ कमल भंसाली