शिर्षक: आहट
धरा पर फूल होंगे, नभ में चाँद और सितारे होंगे
कल हम नहीं होंगे, पर चर्चे कहीं हमारे भी होंगे
गुजरा वक्त किसी के साथ, कहीं किस्सा बनेगा
कभी, कहीं, झुकी हुई पलको का हिस्सा बनगा
कहाँ जायेगे कह नही सकते, पर दिलों में रहेंगे
ये सोच के हम मुस्करा लेते, याद हम भी आयेंगे
तमाम उम्र गुम हो गयी, मंजिले तो वहीं ही रही
बहुत कुछ खो गया, फिर भी उम्मीदें हँसती रही
क्या कहता जिंदगी को जिसे रुलाने की आदत रही
था कभी, अब ये बात वक्त की बहती हवाओं में रही
कल कौन रहेगा ? ये सिर्फ अब राहत की बात रही
अफसोस की चौखट पर मृत्यु की आहट बेजुबान रही
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali