तो चलना कही दूर चलते है जन्हा मिलना केवल ख्वाब न लगे प्यार बाजारों में मिलता कोई राग न लगे जन्हा रूहो का मिलन हो न बददुवा हो न जलन हो जन्हा प्यार के बीच मैं कोई धर्म न आए
सरेआम माथा चुमू तो लोगो को शर्म ना आए
जन्हा खोने पाने का हिसाब न हो
एक हो जाना सिर्फ किस्सा ए किताब ना हो
चल ना कही दूर चलते हे
चल ना कही दूर चलते है