रात में आंसू वो को बिखरते देखा है
खुद को मेने सुबह में फिर से निखरते देखा है
स्वीकृति देखी हे त्याग देखा है
खुद को बागी सा बाग देखा है
नींदों को रातों से डरते देखा है
मैंने खुद को सपनो का कतल करते देखा है
समय को शून्य से भी नीचे उतरता देखा है मैंने खुद को कुछ ऐसे भी गुजरते देखा है