शिर्षक: अक्सर
बन्धु मेरे
कभी टूट जाओ
तो ये न सोचना
अब कुछ नहीं बचा
बस ये सोचना
कहीं खंडित हुए हो
उसे फिर से जोड़ना
तुम पत्थर नहीं हो
जो टूटकर चूर हो जाओगे
तुम बदलते हुए
मौसम के फूल हो
आज मुरझाए हो
कल फिर खिल जाओगे
हाँ, एक सोच ही है
जिससे हम सभी परेशां है
कोई हमें तोड़ता है
कहीं हमसे कोई टूटता है
खिलौना की दुनियां में
हाँ, अक्सर ऐसा ही होता है ।
✍️कमल भंसाली