शिर्षक: इल्जाम
क्या जबाब देता उसे बेवफाई के इल्जाम का
दुनिया बदल जाती, जब लहजा हो इंतकाम का
प्यार नहीं कोई अंदाज, शब्दों के सौगात का
नासमझ न बनो, जब सफर हो साथ-साथ का
कल फूल और आज काँटे, दस्तूर जीवन का
न मिले किनारे तो दोष नहीं, कोई साहिल का
इश्क रँग न बदले, जब मौसम न हो उल्फत का
इल्जाम तो एक रोग है, बिगड़ी हुई मोहबब्त का
दर्द दिल में होता, यार जब खत लिखता बेवफाई का
कैसे उसे समझाये, दौर ये अच्छा नहीं होता इश्क का
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali