मेरी तमाम बेताब रातें जो सितारों के आगोश में
कट गयीं
मेरी हसरतों की वो हज़ार ख्वाहिशें जो तन्हाइयों में
सिमट गयीं
एक तूफां आया जो बहा कर ले गया अश्क के समंदर के रेत को।
कितनी शिद्दत से लिखा था कहानियाँ उंगुलियों के सहारे
वो मिट गयीं।
वो मकाँ तेरी यादों का एक खँडहर में तब्दील हो के रह गया है आज
कदम रखा था जो दहलीज़ पार कर हमनें उसकी रूह मुझसे लिपट गयी।
क्या कहता उस से खामोश रहा सिसकता रहा मैं।
आसुंओ से लिखी इबारत प्यार के अश्को से कट गई।