वाणी
" मुंह में जुबान है तो उससे कैसे संभलना है वो भी आना चाहिए,
बिना समझे, बिना जाने , बिना कुछ सोचे कुछ भी बोलना नहीं चाहिए,
क्युकी जब ये जुबान लड़खड़ाकर कुछ ऐसा बोल देती है की जिससे सामने वाले की इज्जत पे बात आती है,
गुस्सा हमेशा काम बिगाड़ता है और तो और उसी गुस्से से हमारी खुद की इज्जत सामने वाले की नजर में कम हो जाती है,
इसी लिए जब भी बोले जो भी बोले सोच समझ के बोले,
और हर बार चुप भी नही रहेना चाहिए लेकिन जितनी जरूरत हो उतना ही बोलना चाहिए,
इंसान की पहेचान उसकी वाणी से होती है ना की उसकी जात , रंग, रूप, कपड़े, स्टेट्स, से,
जितना अपनी वाणी में लगाम होगी उतनी ही आपकी पहेचान उपर उठेगी।"
HAVE RESTRAINT IN SPEECH RESPECT WILL FIND ITSELF.