जीवन-मुक्तक
मकसदों को इतनी हवा न दो
कि मंजिलों में आग लग जाये
नाव को कभी इतनी गति न दो
कि हादसों को खबर लग जाये
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सुबह की किरणों से रोज नहाओं
जिस्म को रोज पसीने से भिगाओं
प्रार्थनाओं से अपनी गर्दन झुकाओं
क्या चाहते हो ? जरा प्रभु की बताओं
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सत्य ही जीवन का सही सारः है
दर्द को बांटना ही सच्चा प्यार है
अँहकार में जीना ही धिक्कार है
तथ्य, मृत्यु, सत्य का आकार है
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आये है, तो जाना भी तयः है
कुछ खोने का डर ही, भय है
जो नहीं दिख रहा, वो निर्भय है
आत्मा ही सिर्फ अमर-अजय है
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आंतरिक-ज्ञान ही सिर्फ प्रकाश है
हसरतों का अपना विस्तृत आकाश है
धर्म ही धरती से, हर राह का निकास है
समझ अगर सही, तो वो जीवन-सारांश है
✍️ कमल भंसाली