जरा सी बात थी वो ?
यूं मेरे ख़यालो में आके मेरी नींद से सौदा कर लेना
मेरे अनसुलझे मन की आखिरी मंज़िल बन जाना
मेरी आंखो में बहते दरिया का साहिल बन जाना
मैं हसूं तो मुस्कान, रोऊं तो आंसू, भटक जाऊं तो दिशा की रोशनी बन जाना
मेरे हमेशा खामोश रहे दिल की बेपरवाह हलचल बन जाना
यूं किसी तपती रेत को बारिश का यकीन दिलाना
और एक दिन इन सब बातों को एक हसीन ख़्वाब साबित कर देना
जरा सी बात थी ?