वो शाम नजाने क्यों इतनी जल्दी बीत बीत गयी।
उस दिन मानो जैसे कुछ बदल गया था,
उस दिन उसका प्यार हमारे लिए और बढ़ गया था,
उस दिन हम दो नही एक हो गए थे,
उसदिन तुमसे हम कुछ कहना भी चाह रहे थे,
तुमको पकड़ के रोना भी चाह रहे थे,
उस दिन वो शाम मगर जल्दी बीत गयी,
वो शाम नजाने क्यों जल्दी बीत गयी।
तुम्हारी जुल्फों को तुम्हारी आँखों से हटाता जा रहा था,
तुम्हारे करीब मैं आता जा रहा था,
अपने सर को तुम्हारे पैरों पे रख कर कही खो गया था,
तुम्हारी आँखों को देख देख कर नशे में धुत हो गया था,
मगर उस रात तो वो शाम जल्दी बीत गयी,
वो शाम नजाने क्यों उस रात इतनी जल्दी बीत गयी(2)