अगर टूटा नही इश्क में तो वो तेरा इश्क कैसा, लाख किये है गुनाह उसने तूने उसको माफ नही किया तो तेरा ये रस्क कैसा,जो कहे भूल जा मुजे ओर तू मुस्करा कर उसको आज़ाद न कर दे तो तेरा उसको चाहना कैसा।ओर मुस्करा के छोड़ के उसको तेरा उसके परछाई बन कर साथ न रहना फिर ये तेरा इश्क कैसा