शिर्षक: बेबस रिश्ते
कब हम मिले, कब हम बिछड़ गये
सुना है, आजकल हम दोनों रुठ गये
सम्पर्को के संसार मे, हम कितने बदल रहे है
अपनें ही, अस्तित्व को जग जाहिर कर रहे है
कल ही मिले थे, साथ-साथ चल रहे थे
मुस्कानों के साथ, प्यार के पल जी रहे थे
अचानक क्या हुआ, न जाने, क्यों बदल रहे थे
दौर खुमारी का था क्या ? जो साथ चल रहे थे
प्यार तो हमारे नैनों में, जब तब उभर आता
हम ने समझा, ये ही बंधन का होगा कोई रास्ता
चुंबकीय आकर्षण में, पथ आगे का भुला जाता
हक़ीक़क्त ये रही, ऐसा प्यार कभी मंजिल न पाता
कौन कितना, अच्छा कौन बुरा, तयः नहीं हो पाता
आज की सुर्खियों में, सच्चा प्यार भी बेबस हो जाता
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali