संध्या वंदन बृहस्पतिवार शुभ गुरुवार शुभ वीरवार- ब्रह्मदत्त सभी विष्णु भक्तों को वीरवार संध्या की शुभकामनाएं एवं बधाई
Shree Vishnu Mantra
श्री विष्णुमंत्र
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वर ।
गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
विष्णु मंत्र का सार ब्रह्मदत्त त्यागी
मैं भगवान विष्णु को नमन करता हूं जो इस सृष्टि के पालक और
रक्षक हैं, जो शांतिपूर्ण है, जो विशाल सर्प के ऊपर लेटे हुए हैं जिनकी
नाभि से कमल का फूल निकला हुआ है जो ब्रह्मांड का सृजन करता
है, जो एक परमात्मा है, जो पूरी सृष्टि को चलाने वाला है, जो
सर्वव्यापी है जो बादलों की तरह सांवले हैं जिनकी आंखें कमल के
समान है, वही समस्त संपत्तियों के स्वामी हैं, योगी जन उनको समझने
के लिए ध्यान करते हैं, वह इस संसार के भय का नाश करने वाले हैं,
सब लोगों के स्वामी भगवान विष्णु को मेरा नमस्कार।
प्रस्तुतीकरण- ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़