Hindi Quote in Motivational by Kunal Saxena

Motivational quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

मै एक संस्कृत का अनुरागी हु। मैने पहली बार संस्कृत में लेख लिखा है। फॉन्ट की गड़बड़ी के कारण यहाँ श् की जगह ष और ष की जगह श् आ गया है। इसमे पहले संस्कृत और उसका अनुवाद भी दिया गया है।

भारते स्त्रीं प्रति उदारवादी विचारधारा-
नरः नारी च सृश्टि संचालनस्य आधारः। येन प्रकारेण नद्याः द्वि सिरे भवति तेन सम्यक प्रकारेण समाज व्यवस्थायाः संचालनाय द्वि आधारः स्तः- स्त्री पुरुशष्च इति। एतयोः कमपि अभावस्य न्यूनतायाः वा परिस्थितौ सृश्टिः संचालन नैव सम्भवः। प्रत्येकः समाजे स्त्री पुरुशयोः परिस्थितौ भेदं वर्तते। यदि कष्चित् समाजे स्त्रीणां दषा उच्चम् वर्तते तर्हि अस्य विपरीतं अपरः समाजे पुरुशाः स्थितिः स्त्रीणां अपेक्षया उत्तमा वर्तते। मातृसत्तात्मकं समाजेशु सर्वोच्च सत्ता मातृहस्ते वर्तते। यदा पितृसत्तात्मकं समाजेशु पितुः पार्ष्वे सम्पूर्ण षक्तिः सत्ता केन्द्रितं वा वर्तते।
अधिकांषतः सामाजिक विचारकाः स्त्रीणां पुरुशाणां च स्थिते उद्दिष्य विचारः कृतवान अस्ति। गॉधीवर्यः भारतीय समाजस्य वर्णितं सन् समाजे स्त्रीणां स्थिते गम्भीरता पूर्वकं अध्ययनोपरांतः तां सामाजिक अपवादात् मुक्तं कर्तुं संघर्श कृतवान। तेन भारतीय स्त्रीणां दषा विलोक्य तां प्रति असीमितं सहानुभूतिः प्रदर्षितः। तेन स्त्री पुरुशयोः समस्यां भिन्नं प्रकारेण व्यक्तं कृतः।
तेन लिखितं यत्-
येन प्रकारेण मूलतः स्त्री पुरूशः च एकोस्ति तेन सम्यक प्रकारेण एतयोः समस्यानाम् मुलं एकमेव अस्ति। एतयो कोपि भिन्नता नास्ति। एतयोः परस्परं पुरके वर्तते। एतयो कमपि एकः सक्रिय सहाय्यं विना जीवितुं न षक्नोति।
अर्थः- नर और नारी सृश्टि संचालन का आधार है। जिस प्रकार से नदी के दो सिरे होते है ठीक उसी प्रकार से समाज की व्यवस्था के संचालन के लिये दो आधार है- स्त्री और पुरुश।
इन दोनो में से किसी भी एक के अभाव या कमी से सृश्टि संचालन संभव नही है। प्रत्येक समाज में स्त्री और पुरूश की परिस्थिति में अंतर है। यदि किसी समाज में स्त्रीयो की दषा उच्च होती है तो इसके विपरीत दूसरे समाज में पुरुश की स्थिति स्त्रीयों अपेक्षा उत्तम होती है। मातृसत्तात्मक समाज मे सत्ता माता के हाथो में होती है। जबकि पितृसत्तात्मक समाज मे सत्ता पिता के पास सम्पूर्ण षक्ति अथवा सत्ता केन्द्रित होती है।
अधिकांष सामाजिक विचारको ने स्त्री और पुरुशो की स्थिति के बारे में विचार किया है। गॉधी जी ने भारतीय समाज का वर्णन करते हुये समाज मे स्त्रीयो की स्थिति का गंभीरता पूर्वक अध्ययन के उपरांत उनको सामाजिक बुराईयो से मुक्त करने के लिये संघर्श किया। उन्होने भारतीय स्त्रीयो की दयनीय दषा को देखकर उनके प्रति असीमित सहानुभूति प्रदर्षित की। उन्होंने स्त्री पुरुश की समस्या भिन्न प्रकार से व्यक्त की।
उन्होनें लिखा कि
जिस प्रकार से मूल रूप से स्त्री पुरूश एक है ठीक उसी प्रकार से इन दोनो की समस्या का मूल भी एक ही है। इन दोनो में कोई भिन्नता नही है। यह दोनो परस्पर एक दूसरे के पूरक है। इन दोनो में से किसी एक की भी सक्रिय सहायता बिना जीवित नहीं रह सकता है।

Hindi Motivational by Kunal Saxena : 111752877
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now