डर है कही तुझसे मोहब्बत ना हो जाए,
थामा है जो हाथ इसकी आदत ना हो जाए,
यूँ नख़रे उठाया ना करो यूँ मुस्कुराया ना करो हमारा दिल नादान सा है इस कदर आँखे मिलाया ना करो।
यूँ अपना कह के महफ़िल में बुलाया ना करो,
इश्क़ में थोड़ा नादान है हमारे दिल को खिलौना समझ के खुद का दिल यू बहलाया ना करो।