शीर्षक: अधूरापन
जिंदगी नदिया की बहती वो धारा है
जिसमें आधा सवेरा, आधा अँधेरा है
हर कोई अधूरी,कहानी का अधूरा नायक है
बिन कोई आशा के चलना ही फलदायक है
वक्त नजरअंदाज होता रहता, जिंदगी चलती रहती
फूलों भरे रास्तों में भी, कांटो सी चुभन होती रहती
सवाल क्या है ? उतर से भी, फिर सवाल आता है
चाहत के कितने सबूत हो, प्यार अधूरा नजर आता है
बहुत कुछ खो जाता, जिंदगी को संयमित हो जीने में
बहुत कुछ बह जाता, जिंदगी को उस पार ले जाने में
हक़ीक़क्त यही है, नश्वर काया सदा भरम में रहती है
रैनबसेरा जहाँ को, वो अपना स्थायी आवास कहती है
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali