शीर्षक: बिकना जरुरी है
अफसानों के बाजार में, जिंदगी के व्यापार में
तुम और हम कुछ नहीं, इस मुद्रा के संसार में
जो कुछ हासिल कर रहे, क्या वो अपना है ?
हक़ीक़क्त कहती, गहरी नींद में मधुर सपना है
फिर क्यों इतनी आपा-धापी ?, संयमित रहना है
भूल गये, मृत्यु के दरवाजे पर कोई नहीं ताला है
तुम कहते दूर का सफर, बहुत कुछ साथ रखना है
मेरी भी सुनो जरा, आजकल दुर्घटनाओं का जमाना है
कीमतों में हो रहे उछाल को, तुम विकास कह रहे हो
पता नहीं जिस्म के किस अंग को, बेच के, कह रहे हो
"कमल", दफन हो रही जिंदगी में, नफा भी जरुरी है
वाणिज्यिक सँसार में, खुद का बिकना भी जरुरी है
✍️ कमल भंसाली