शीर्षक: स्याह रात
कल जिंदगी पास थी, आज दूर है
कल की खुशियाँ, अब रस्म भर है
कल के बेगाने, अब अपने लगते है
ख्याल टूट रहे, सपने अच्छे लगते है
मुद्दतों की उदासी, अब जरुरत लगती
चेहरे की मुस्कान, अब फीकी लगती
दिल घायल, कहना वाजिब नहीं लगता
बोझ तले दबा प्यार, स्वतंत्र नहीं लगता
मंजिल एक ही बची, उसकी चिंता नहीं
अनचाही प्रेमिका, कभी बेवफा होती नहीं
अस्त होती सुंदरी शाम, स्याह रात बनेगी
हाँ, आज की चिंता से, कल चिता जलेगी
✍️ कमल भंसाली