बशीर बद्र के इश्क़ का उनवान
‘कोई फूल सा हाथ कांधे पर था
मेरे पांव शोलों पर चलते रहे।
बशीर बद्र की पंक्तियों मे जिस हाथ का ज़िक्र आया है। वह हाथ इश्क का नहीं तो औरत का है। इश्क की तुलना फूल, खुशबु और शबनम से तुलना कोई नई बात नही। औरत को इश्क का पर्याय कहा जा सकता है। वह खुशबु की तरह भली, शबनम की तरह साफ होती है।
आज इंसान भीड़ मे रहकर भी खुद को अकेला महसूस कर रहा है। रोज़मर्रा के जीवन मे मशीन, तकनीक, व्यापार और कठोरता हावी हो गए हैं। ज़िन्दगी बहुत ज्यादा मशीनी और व्यापार मूलक राह पर चल रही है। भाग- दौड़ के युग मे ज़िन्दगी मे प्यार और एहसास के लिए हमारे पास वक्त नही है।