बस आज जो है वही है जिंदगी वही है जिंदगी...
बस ऐसे ही गुजर जाती है जिंदगी...
अभी तो बहोत है मे ही कभी निकल जाती है जिंदगी...
कब तक साथ है जिंदगी का किसे पता...
रात को है सुबह नहीं भी है ये जिंदगी...
अपने आप मे एक राज है ये जिंदगी...
कितनी अभी बाकि है ये भी कहा बताती है ये जिंदगी...
जब भी मौका मिले जीने का खुलकर जिले अब जिंदगी...
नहीं इनका अब कोई भी भरोसा कब धोखा भी दे जाये ये जिंदगी...
क्या पता कब हमेशा के लिए खामोश कर जाए ये जिंदगी...
किसी रात की कभी सुबह भी ना हो ये खेल भी कभी खेल जाए ये जिंदगी....
ऐसी ही है अजीब है ये जिंदगी बस पल दो पल मे ही खत्म हो जाऐ ये जिंदगी...
आज तो लगता है अभी तो बहोत पल बाकि है ये जिंदगी...
पता नहीं कौन सा पल वो आख़री कर कही खो जाए ये जिंदगी...
पल मे साथ छोड़ दग़ा भी कर जाती है ये जिंदगी...
जब भी मौका मिले जीने का जिले यही हर पल कहती है ये जिंदगी....
बस आज जो है वही है जिंदगी वही है जिंदगी....
हेतल. जोशी.. राजकोट