कुछ दोहे सादर प्रस्तुत हैं। 🙏🙏🙏🙏
मुस्कान, व्यास, रजनीगंधा, कुंदन, संधान
1 मुस्कान
मुखड़े पर मुस्कान हो, मिले सदा सम्मान।
सूरत-रोनी देख कर, गुम जाती पहचान।
2 व्यास
वेद व्यास ने हैं लिखे, अनुपम वेद-पुरान।
ग्रंथ महाभारत रचा, लेखक आज महान।।
3 रजनीगंधा
रजनीगंधा की महक, छा जाती चहुँ ओर।
मन मयूर सा नाचता, लगे सदा चितचोर।।
4 कुंदन
मानव मन कुंदन बने, निर्मल रहे स्वभाव।
जिस समाज का बिम्ब यह, कभी न डूबे नाव।।
5 संधान
भारत की गौरव सिला, राणा रहे महान।
छद्म वेश बहुरूपिए, साध रहे संधान।।
राष्ट्र विरोधी ताकतें, हैं करतीं संधान।
राष्ट्र भक्त सब जानते, लें कैसे संज्ञान।।
प्रत्यंचा पर खींचकर, किया लक्ष्य संधान।
शब्द बाण से व्यथित हैं, राष्ट्र भक्त इंसान।
सबके हित की सोच से, लेखक बने महान।
सृजनशीलता से विमुख, विध्वंसक संधान।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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