Hindi Quote in Poem by Rajesh Maheshwari

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बोझा

आज सुबह नाश्ते में
लड्डू, जलेबी और बादाम का हलुआ देखकर
मन बाग बाग हो गया।
इतना बढिया नाश्ता देखकर
मैं पत्नी के प्यार में खो गया
मेरी वाणी और मेरे स्वर में
उनके लिये बेहद प्यार आ गया
परंतु उनका जवाब सुनकर
मैं तो चक्कर ही खा गया
पडोसी का लडका
कालेज के अंतिम वर्ष में
प्रथम श्रेणी में प्रथम आया था
इसी खुशी में मैंने अपनी प्लेट में
यह लडडू पाया था
यह तो तय था कि उसे
कोई अच्छी नौकरी मिल जायेगी
और फिर जिंदगी भर
उससे चापूलसी करवायेगी।
दूसरे पडोसी की लडकी थी अलबेली
उसके अनुत्तीर्ण होने पर
बांटी गई थी जलेबी
उसे कर दिया था
महाविद्यालय से बाहर
इसलिये बहुत खुश थे
उसके मदर और फादर
वह रोज सिने तारिका बनकर
महाविद्यालय जाती थी
हर दिन उनके पास उसकी
नई नई शिकायत आती थी
अब वे कर सकेंगे
उसके पीले हाथ
और फिर तीर्थयात्रा पर
चले जायेंगे बद्रीनाथ।
तीसरा था एक नेता का लडका
पढने लिखने में था एकदम कडका
बडी मुश्किल से निकल पाया था
परीक्षा में केवल पासिंग मार्क्स लाया था
नेता जी खुशी जता रहे थे
लोगो को बता रहे थे
थर्ड डिवीजन में आया है
बडा उजला भविष्य लाया है
बहुत किस्मत वाला है
मुझसे ऊँचा जाएगा
मैं तो केवल नेता हूँ
यह मंत्री बन जाएगा
सबसे कह रहे थे मांगो दुआ
सबको खिला रहे थे
बादाम का हलुआ
मैं जैसे सो गया
अपने ही ख्यालों में खो गया
पहले जनता का बोझ ढोता था गधा
अब गधे का बोझा ढोयेगी जनता
लोकतंत्र का नया रूप नजर आएगा
लोक अब तंत्र का बोझा उठाएगा।

Hindi Poem by Rajesh Maheshwari : 111746536
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