प्रेरणा
क्षण भर पहले वह हँस रहा था
अचानक हुई दुर्घटना
और वह सडक पर पडा कराह रहा था
एकत्रित हो गई भीड
कर रही थी एम्बुलेंस की प्रतीक्षा
और समय बिताते हुए
कैसे, कब, क्या हुआ
कर रही थी इसकी समीक्षा।
मैंने उसे उठाया सहारा देकर अस्पताल पहुँचाया।
अस्पताल में चिकित्सक ने बताया
थोडा सा भी विलम्ब कर सकता था बडा अनर्थ।
मैंने ईश्वर को धन्यवाद दिया
जिसने मुझे निमित्त बनाकर
उसको जीवन दान दिया
और मेरे जीवन को समझाया जीने का अर्थ।
उसकी आँखों से झाँकती हुई संवेदना
उसमें जागी हुई जीवन की आशा
और मेरे प्रति उसका आभार
आज भी मुझे दिखता है
मेरी आँखों में झूलता हुआ।
मुझसे कहता है -
कभी किसी पीडित की
सहायता में विलम्ब मत करना।
किसी को मदद की हो आवश्यकता
तो मत करना किसी की प्रतीक्षा।
तुम्हारी यह सेवा और सेवा की तत्परता
तुम्हारे जीवन को देगी सार्थकता।