शीर्षक: बेहाल
तन्हां जिंदगी में, हजारों ख्याल होते है
ये वो फूल है, जो खिलकर मुरझा जाते है
रुख नहीं जोड़ती जिंदगी, आजकल
नादानियों से सँवर मुस्कराती, आजकल
फ़लसफ़ा जिंदगी का और बेहतर होता
अगर उसमें, तोहिने हाल का जिक्र न होता
गम के दौर में कोई अपना गले न लगता
जज्बात की आग में, क्या बचा, जो रहता
मजबूरियों में इँसान, इतना क्यों बिखर जाता ?
ये वो सवाल है, जिसका हर उत्तर गलत होता
सबक तन्हाई का, हर गम बेहया ही होता
कब छोड़े, कब पास बुलाये, बेहाल कर जाता
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali